अगर आपने हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति या दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरें देखी हैं, तो आपने BRICS का नाम जरूर सुना होगा। पहले BRICS को मुख्य रूप से पांच देशों के समूह के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब इसका काफी विस्तार हो चुका है।
BRICS में दुनिया की कई बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं। भारत भी इसका एक महत्वपूर्ण सदस्य है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर BRICS क्या है, इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं और भारत के लिए इसका क्या महत्व है?

BRICS क्या है?
BRICS एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय सहयोग समूह है जिसमें कई उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं। इन देशों के बीच व्यापार, अर्थव्यवस्था, निवेश, तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होती है।
BRICS की शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी। इसमें शुरुआत में ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। बाद में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।
समय के साथ इस समूह में और भी देश शामिल हुए हैं।
BRICS का नाम BRICS क्यों रखा गया?
BRICS नाम इसके शुरुआती सदस्य देशों के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना है।
- B – Brazil
- R – Russia
- I – India
- C – China
- S – South Africa
यही पांच देश BRICS के शुरुआती प्रमुख सदस्य थे।
हालांकि अब समूह का विस्तार हो चुका है, लेकिन इसका नाम BRICS ही है।
2026 में BRICS में कितने देश हैं?
2026 में BRICS का विस्तार हो चुका है। वर्तमान सदस्य देशों में शामिल हैं:
- ब्राज़ील
- रूस
- भारत
- चीन
- दक्षिण अफ्रीका
- मिस्र
- इथियोपिया
- ईरान
- संयुक्त अरब अमीरात
- सऊदी अरब
- इंडोनेशिया
इस विस्तार के बाद BRICS का दायरा पहले की तुलना में काफी बड़ा हो गया है।
BRICS का मुख्य उद्देश्य क्या है?
BRICS का उद्देश्य केवल एक-दूसरे के साथ बैठक करना नहीं है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं।
सबसे बड़ा उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ाना है।
इसके अलावा सदस्य देश इन क्षेत्रों में भी सहयोग करने की कोशिश करते हैं:
- व्यापार और निवेश
- विज्ञान और तकनीक
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- ऊर्जा
- कृषि
- डिजिटल तकनीक
- पर्यावरण और सतत विकास
BRICS के माध्यम से सदस्य देश वैश्विक स्तर के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मिलकर चर्चा भी करते हैं।
भारत के लिए BRICS क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत BRICS के शुरुआती सदस्य देशों में से एक है। इसलिए इस संगठन में भारत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।
भारत को BRICS के माध्यम से दूसरे सदस्य देशों के साथ व्यापार और आर्थिक संबंध बढ़ाने का अवसर मिलता है। इसके अलावा भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात भी रख सकता है।
भारत के लिए BRICS इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं।
2026 में भारत की भूमिका
2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत कर रहा है। इसलिए इस साल भारत के लिए BRICS और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
अध्यक्ष देश के रूप में भारत के सामने अलग-अलग सदस्य देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को दिशा देने की जिम्मेदारी रहती है।
BRICS New Development Bank क्या है?
BRICS देशों ने New Development Bank (NDB) नाम का एक विकास बैंक भी बनाया है।
इसका उद्देश्य मुख्य रूप से सदस्य देशों और अन्य विकासशील देशों में बुनियादी ढाँचे और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराना है।
यानी BRICS केवल बातचीत का मंच नहीं है, बल्कि इसके जरिए वित्तीय और विकास से जुड़ा सहयोग भी किया जाता है।
क्या BRICS डॉलर को खत्म करना चाहता है?
BRICS को लेकर इंटरनेट पर अक्सर यह बात कही जाती है कि BRICS अमेरिकी डॉलर को खत्म करके अपनी अलग मुद्रा लाने वाला है।
इस मामले में थोड़ी सावधानी जरूरी है।
BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा जरूर होती रही है, लेकिन इसे सीधे तौर पर “डॉलर खत्म करने की योजना” कहना सही नहीं होगा।
इसलिए सोशल मीडिया पर चलने वाली हर खबर को सही मानने के बजाय आधिकारिक जानकारी देखना बेहतर है।
BRICS से सदस्य देशों को क्या फायदा हो सकता है?
BRICS के सदस्य देशों को कई क्षेत्रों में सहयोग का फायदा मिल सकता है।
उदाहरण के लिए, देशों के बीच व्यापार बढ़ सकता है, निवेश के नए अवसर बन सकते हैं और विकास से जुड़ी परियोजनाओं में सहयोग किया जा सकता है।
इसके अलावा विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी एक-दूसरे के अनुभवों से फायदा उठाया जा सकता है।
BRICS के सामने चुनौतियाँ भी हैं
BRICS जितना बड़ा हुआ है, उसके सामने चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं।
सभी सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और राजनीतिक परिस्थितियाँ एक जैसी नहीं हैं। कई मुद्दों पर देशों के हित अलग-अलग हो सकते हैं।
इसलिए इतने बड़े समूह में सभी देशों को एक राय पर लाना आसान काम नहीं है।
BRICS की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य देश अपने मतभेदों के बावजूद कितने व्यावहारिक तरीके से एक-दूसरे के साथ सहयोग कर पाते हैं।
निष्कर्ष
BRICS की शुरुआत पांच देशों के समूह के रूप में हुई थी, लेकिन आज इसका दायरा काफी बढ़ चुका है। इसमें अब कई बड़ी और उभरती अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं।
भारत BRICS का महत्वपूर्ण सदस्य है और 2026 में भारत इसकी अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए यह साल काफी अहम माना जा सकता है।
आने वाले समय में व्यापार, तकनीक, अर्थव्यवस्था, विकास और Global South जैसे मुद्दों पर BRICS की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।
अगर आप अंतरराष्ट्रीय राजनीति और दुनिया की अर्थव्यवस्था को समझना चाहते हैं, तो BRICS एक ऐसा विषय है जिस पर नजर रखना काफी उपयोगी रहेगा।
BRICS 2026 से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल
BRICS क्या है?
BRICS कई उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का अंतरराष्ट्रीय सहयोग समूह है।
BRICS की शुरुआत किन देशों से हुई थी?
शुरुआत में ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन BRIC के रूप में जुड़े थे। बाद में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से इसका नाम BRICS हुआ।
क्या भारत BRICS का सदस्य है?
हाँ, भारत BRICS के शुरुआती सदस्यों में से एक है।
2026 में BRICS की अध्यक्षता कौन कर रहा है?
2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत कर रहा है।
BRICS में नए देश क्यों शामिल किए गए?
BRICS के विस्तार का उद्देश्य समूह में अधिक उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को शामिल करके सहयोग का दायरा बढ़ाना है।
क्या BRICS की अपनी मुद्रा है?
नहीं, BRICS की कोई अलग आधिकारिक साझा मुद्रा वर्तमान में नहीं है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा अलग विषय है।